चिंता: अब भारत में भी मिल रहे ‘फॉल्स निगेटिव’ कोरोना संक्रमित, दुनिया में 30 फीसदी हैं ऐसे मरीज:UttarakhandSmachaar
कहीं आप भी कोरोना के ‘फॉल्स निगेटिव’ मरीज तो नहीं?
वॉशिंगटन Updated Thu, 09 Apr 2020 07:01 AM
कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ जाए इसका मतलब ये नहीं की आप संक्रमित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे कई मामले आ चुके हैं जिसमें रोगी संक्रमित तो था लेकिन शुरुआती जांच में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। दुनियाभर में ऐसे कई मरीज सामने आए हैं जिन्हें खांसी, सांस में तकलीफ और तेज बुखार जैसे कोविड-19 के लक्षणों से जूझ रहे थे और जब जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई बाद में संक्रमित पाए गए।
डॉक्टरों ने उन्हें घर में रहने की सलाह दी और लक्षण बढ़ने पर दोबारा आने को कहा। कुछ दिन बाद हालत ज्यादा खराब होने लगी तो फिर डॉक्टरों का रुख किया। डॉक्टरों ने इनकी दोबारा जांच के लिए सैंपल ले लिया और जब थोड़े समय बाद रिपोर्ट आई तो वह भी निगेटिव निकली।
इसका एक कारण सैंपल लेते वक्त नाक के बहुत भीतर से नासिक स्राव लेना होता है। इसके लिए स्वॉब को नाक में कई देर घुमाना भी होता है। कमजोर तकनीक भी ‘फॉल्स निगेटिव’ का कारण हो सकती है। दरअसल, ऐसे मामले जो पहले निगेटिव थे फिर पॉजिटिव पाए गए या संक्रमित थे लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई उन्हें फॉल्स निगेटिव कहा जाता है।
संक्रमण शुरू न हुआ हो
30 फीसदी तक फॉल्स निगेटिव
सिर्फ एक जांच पर न टिकें
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